• Contact Us: +91-98153-33907
प्रेम का लक्षण

प्रेम का लक्षण

तुम्हे जो कुछ भी मिला है उस परमात्मा से तुम अकेले ही हकदार हो उसके!! ऐसा मत मान लेना, तुमने जिस-जिस से पाया है या तुम पा रहे हो, तुम जिस-जिस से जुड़े हो, केवल परिवार ही नही और भी कोई है जो इस प्राप्ति का हकदार है| जो कभी तुमसे मांगते भी नहीं शायद| क्योकि मांगने की आदत से वे मजबूर नहीं नहीं हैं, वे आश्रित हैं उस एक पर..
पत्नी, परिवार से भी आगे का शब्द है..प्रकृति… तुम हर पल इससे पाते हो, ये पंछी सुबह उठकर गीत गुनगुनाते हैं…किसके लिये… तुम्हारे लिये.. |
फूलों के खिलने का भला अपना क्या स्वार्थ हो सकता है? सब तुम्हारे लिये ही तो है…
कुछ लोग सिमट कर रह जाते हैं, क्योकि वे केवल बटोरने को ही जीवन समझ बैठे हैं… अनभिज्ञ हैं, अन्जान हैं इस बात से कि बटोरने के पीछे अशान्ति खड॒ी है, दरिद्रता खड़ी है, असली सुख तो बांटने मे है… बटोरना तो वासना का लक्ष्ण है और बांटना प्रेम का लक्ष्ण है|
सबसे हर समय कुछ न कुछ बटोरने की चाह वासना का लक्ष्ण है और सबको हर पल बिनाशर्त सबकुछ न्यौछावर कर देने की चाह प्रेम का लक्षण है, इसलिये बांटने मे ही आनन्द है, मोक्ष है..
बांटना उस अनन्त की यात्रा का रखा गया कदम है…धन व पदार्थ का बांटना तो मात्र कोशिश है… कि तुम प्रेम को बांटना सीख जाओ, कि बांटना तुम्हारा स्वभाव बन सके….

-नित्यश्री

No Comments

Give a Reply